Showing posts with label love. Show all posts
Showing posts with label love. Show all posts

Sunday, 10 August 2014

तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते / फ़राज़

तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते हैं
तो ख़्यालों में बहुत दूर निकल जाते हैं

गर वफ़ाओं में सदाक़त भी हो और शिद्दत भी
फिर तो एहसास से पत्थर भी पिघल जाते हैं

उसकी आँखों के नशे में हैं जब से डूबे
लड़-खड़ाते हैं क़दम और संभल जाते हैं

बेवफ़ाई का मुझे जब भी ख़याल आता है
अश्क़ रुख़सार पर आँखों से निकल जाते हैं

प्यार में एक ही मौसम है बहारों का मौसम
लोग मौसम की तरह फिर कैसे बदल जाते हैं

Sunday, 15 September 2013

बस यूँ ही

 

जब भी शाम गहराती है

तेरी याद आ जाती है... बस यूँ ही

मेरा कोई इरादा नहीं होता

फिर भी सता जाती है ... बस यूँ ही

तेरे मुरीद हम नहीं हैं

हक अपना जताती है ... बस यूँ ही

लाख कर लूँ बंद दरवाजे दिल के

चुपके से घर बना जाती है ... बस यूँ ही

 

तेरे हाथों में खंजर तो नहीं दिखता

मैं फ़ना हो जाता हूँ ... बस यूँ ही

दिल की लगी को दिल्लगी समझते हो

कभी दिल भी लगाओ ... बस यूँ ही

कब से साकी बने बैठे हो

कभी शराब भी बन जाओ ... बस यूँ ही