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Sunday, 10 August 2014
तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते / फ़राज़
तुझसे मिलने को कभी हम जो मचल जाते हैं
Saturday, 2 August 2014
BAAD MUDDAT UNHE DEKHKAR YUN LAGA/ ALI SARDAR ZAFARI
बाद मुद्दत उन्हें देख कर यूँ लगा
जैसे बेताब दिल को क़रार आ गया
आरज़ू के गुल मुस्कुराने लगे
जैसे गुलशन में बहार आ गया
तिश्न नज़रें मिली शोख नज़रों से जब
मैं बरसने लगी जाम भरने लगे
साक़िया आज तेरी ज़रूरत नहीं
बिन पिये बिन पिलाये खुमार आ गया
रात सोने लगी सुबह होने लगी
शम्म बुझने लगी दिल मचलने लगे
वक़्त की रोश्नी में नहायी हुई
ज़िन्दगी पे अजब स निखार आ गया
Saturday, 7 June 2014
सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
A beautiful gazal by famous Urdu Shayar "Ahmad Faraz"
सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते-जाते
वरना इतने तो मरासिम थे कि आते-जाते
शिकवा-ए-जुल्मते-शब से तो कहीं बेहतर था
अपने हिस्से की कोई शमअ जलाते जाते
कितना आसाँ था तेरे हिज्र में मरना जाना
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते-जाते
जश्न-ए-मक़्तल ही न बरपा हुआ वरना हम भी
पा बजोलां ही सहीं नाचते-गाते जाते
उसकी वो जाने, उसे पास-ए-वफ़ा था कि न था
तुम 'फ़राज़' अपनी तरफ से तो निभाते जाते
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