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Sunday, 15 June 2014

वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं

A thought provoking poem by Hindi poet "Adam Gondvi"


वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं
वे अभागे आस्‍था विश्‍वास ले कर क्‍या करें

लोकरंजन हो जहाँ शंबूक-वध की आड़ में
उस व्‍यवस्‍था का घृणित इतिहास ले कर क्‍या करें

कितना प्रगतिमान रहा भोगे हुए क्षण का इतिहास
त्रासदी, कुंठा, घुटन, संत्रास ले कर क्‍या करें

बुद्धिजीवी के यहाँ सूखे का मतलब और है
ठूँठ में भी सेक्‍स का एहसास ले कर क्‍या करें

गर्म रोटी की महक पागल बना देती मुझे
पारलौकिक प्‍यार का मधुमास ले कर क्‍या करें

Saturday, 31 May 2014

KARMVEER

A beautiful poem by famous Hindi poet Ayodhya Singh Upadhyay “Hariaudh”.

देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं
रह भरोसे भाग के दुख भोग पछताते नहीं
काम कितना ही कठिन हो किन्तु उबताते नहीं
भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं

हो गये एक आन में उनके बुरे दिन भी भले
सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले फले ।


आज करना है जिसे करते उसे हैं आज ही
सोचते कहते हैं जो कुछ कर दिखाते हैं वही
मानते जो भी हैं सुनते हैं सदा सबकी कही
जो मदद करते हैं अपनी इस जगत में आप ही
भूल कर वे दूसरों का मुँह कभी तकते नहीं
कौन ऐसा काम है वे कर जिसे सकते नहीं ।


जो कभी अपने समय को यों बिताते हैं नहीं
काम करने की जगह बातें बनाते हैं नहीं
आज कल करते हुये जो दिन गंवाते हैं नहीं
यत्न करने से कभी जो जी चुराते हैं नहीं
बात है वह कौन जो होती नहीं उनके लिये
वे नमूना आप बन जाते हैं औरों के लिये ।


व्योम को छूते हुये दुर्गम पहाड़ों के शिखर
वे घने जंगल जहां रहता है तम आठों पहर
गर्जते जल-राशि की उठती हुयी ऊँची लहर
आग की भयदायिनी फैली दिशाओं में लपट
ये कंपा सकती कभी जिसके कलेजे को नहीं
भूलकर भी वह नहीं नाकाम रहता है कहीं ।

Sunday, 23 September 2012

Tum Ek Swapn Ho

तुम एक स्वप्न हो
एक ऐसा स्वप्न जो पहले कभी देखा
स्वप्न में रंग नहीं होता
लेकिन तुम रंगों का सागर हो
ऐसे रंग जो अनुभूत होते हैं
चंचल चमकते पारदर्शी रंग...

तुम एक स्वप्न हो
ऐसा स्वप्न जो जीवन की अविरल धारा
आह्लादित करने वाला कोलाहल
स्वप्न जो शाश्वत सत्य है
शीतल, मृदु , मनोरम...

तुम एक स्वप्न हो
एक ऐसा स्वप्न जो जाता है अचानक
सर्दियों में धूप की तरह
जीवन की कठोरता का हरण करने
नर्म कोमल स्पर्श की तरह...
तुम एक स्वप्न हो /