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Wednesday, 26 September 2012

Tum Prem Anurodh Ho

आशा और निराशा हो

तुम अव्यक्त पिपासा हो

सत्य और असत्य हो

तुम अंतहीन कथ्य हो


पाप और पुण्य हो

तुम अनंत शुन्य हो

आचार और अनाचार हो

तुम जीवन आधार हो


आरम्भ और अंत हो

तुम आनंद अनंत हो

काम और क्रोध हो

तुम प्रेम अनुरोध हो


यथार्थ और स्वप्न हो

तुम अबूझ प्रश्न हो ...

Sunday, 23 September 2012

Tum Ek Swapn Ho

तुम एक स्वप्न हो
एक ऐसा स्वप्न जो पहले कभी देखा
स्वप्न में रंग नहीं होता
लेकिन तुम रंगों का सागर हो
ऐसे रंग जो अनुभूत होते हैं
चंचल चमकते पारदर्शी रंग...

तुम एक स्वप्न हो
ऐसा स्वप्न जो जीवन की अविरल धारा
आह्लादित करने वाला कोलाहल
स्वप्न जो शाश्वत सत्य है
शीतल, मृदु , मनोरम...

तुम एक स्वप्न हो
एक ऐसा स्वप्न जो जाता है अचानक
सर्दियों में धूप की तरह
जीवन की कठोरता का हरण करने
नर्म कोमल स्पर्श की तरह...
तुम एक स्वप्न हो /